Friday, 30 April 2021

प्राईड ऑफ भारत के बाद अब मिस्टर, मिस एन्ड मिसेस प्राइड ऑफ भारत संबंधी ब्यूटी पेजेंट || After Pride of Bharat, Mr., Miss and Mrs. Pride of Bharat beauty pageant to be organized soon

 

जयपुर। गठजोड़ फिल्म्स एंड एंटरटेनमेंट एवं गठजोड़ ग्रुप शीघ्र ही ब्यूटी पैजेंट का आयोजन करने जा रहे है, कोरोना काल के मद्देनजर यह ब्यूटी पैजेंट इस वर्ष वर्चुअल रूप से आयोजित किया जा रहा है। 

उल्लेखनीय हैं कि गठजोड़ फिल्म्स के सी.ई.ओ. महावीर कुमार सोनी "प्राईड ऑफ भारत" Pride of Bharat अवार्ड के फाउंडर डायरेक्टर है, यह अवार्ड उन लोगों के लिए है, जिन्होंने किसी भी क्षेत्र में देश का नाम रोशन किया है या जिनके टैलेंट ने भारत का गौरव सम्पूर्ण विश्व में बढ़ाया है। ऐसे लोग प्राइड ऑफ भारत अवॉर्ड के लिए भी अपना नामांकन प्रेषित कर सकते हैं। 

सोनी ने बताया कि "प्राईड ऑफ भारत अवार्ड्स"  के बाद अब वह मिस्टर, मिस एवं मिसेस प्राइड ऑफ भारत कैटेगरी में पैजेंट शो लेकर आ रहे हैं।  शो में भाग लेने के इच्छुक व्यक्ति शो के फेसबुक पेज Mr, Miss & Mrs Pride of Bharat  पर जाकर इससे संबंधित जानकारी समय समय पर प्राप्त कर सकते हैं। 

Sunday, 17 May 2020

Coming soon - Pride of Bharat, presented by Gathjod Films and Entertainment, Coverage in Fortnightly Newspaper Gathjod, May 16, 2020


Coming soon - Pride of Bharat, presented by Gathjod Films and Entertainment
Founder - Mahavir Kumar Soni
Coverage published in Fortnightly Newspaper Gathjod, May 16, 2020

Wednesday, 28 June 2017

फेसबुक के माध्यम से मतदाता पंजीकरण स्मरण अभियान, निर्वाचन आयोग 1 जुलाई 2017 से शुरू करने जा रहा है यह विशेष अभियान

निर्वाचन आयोग का पहला मतदाता पंजीकरण स्मरण अभियान फेसबुक पर शुरू 


भारत का निर्वाचन आयोग एक जुलाई 2017 से एक विशेष अभियान शुरू कर रहा है जिसके अंतर्गत छूटे हुए मतदाताओं का पंजीकरण किया जाएगा। अभियान के दौरान पहली बार मतदान करने वालों पर विशेष ध्यान दिया जाएगाताकि आयोग के आदर्श वाक्य कोई मतदाता नहीं छूटे की दिशा में आगे बढ़ा जा सके।  

अधिकतम पात्र मतदाताओं तक पहुंचने के लिए, आयोग फेसबुक के साथ सहयोग कर रहा है ताकि 1 जुलाई 2017 को पहला राष्ट्रव्यापी मतदाता पंजीकरण स्मरण अभियान शुरू किया जा सके। भारत में 18 करोड़ से ज्यादा लोग फेसबुक पर हैं। अभी पंजीकरण करें’ बटन भारतीय नागरिकों को निर्वाचन आयोग के साथ पंजीकृत करने के लिए तैयार किया गया है। 1 जुलाई को मतदाता पंजीकरण स्मरण की एक अधिसूचना उन लोगों को भारत में फेसबुक पर भेजी जाएगी जो मतदान करने के योग्य हैं। याद दिलाने का कार्य 13 भारतीय भाषाओं- अंग्रेजी, हिन्दी, गुजराती, तमिल, तेलुगु, मलयालम, कन्नड, पंजाबी, बांग्ला, उर्दू, असमी, मराठी और उड़िया में किया जाएगा।

यह पहला मौका है जब फेसबुक के मतदाता पंजीकरण स्मरण को भारत में शुरू किया जाएगा। 2016-2017 में मुख्य निर्वाचन अधिकारियों ने सम्बद्ध राज्य के चुनावों के दौरान राज्य स्तर पर इस तरह के प्रयास किये थे।

  फेसबुक पर अभी पंजीकरण करें बटन पर क्लिक करके लोग  नेशनल वोटर्स सर्विसेस पोर्टल (www.nvsp.inपर पहुंचेगे जो उन्हें पंजीकरण की प्रक्रिया के जरिए निर्देश देगा।


http://pibphoto.nic.in/documents/rlink/2017/jun/i201762801.jpg
मतदाता पंजीकरण स्मरण की राष्ट्रव्यापी शुरूआत के बारे में मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ नसीम जैदी ने कहा मुझे यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि भारत का निर्वाचन आयोग छूटे हुए मतदाताओं को पंजीकृत करने  के लिए विशेष अभियान चला रहा है, इसमें पहली बार मतदान करने वालों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। यह आयोग के आदर्श वाक्य कोई मतदाता नहीं छूटे को पूरा करने कि दिशा में एक कदम है।

      इस अभियान के अंतर्गत 1 जुलाई 2017 को फेसबुक भारत में फेसबुक का इस्तेमाल करने वाले सभी लोगों को अनेक भारतीय भाषाओं में मतदाता पंजीकरण की याद दिलायेगा। मैं सभी पात्र नागरिकों से आग्रह करता हूं कि वे पंजीकरण कराएं और मतदान करें। यानि अपने अधिकार पहचानें और कर्तव्य का पालन करें।

मुझे उम्मीद है कि इस पहल से निर्वाचन आयोग का पंजीकरण अभियान मजबूत होगा। यह भविष्य के मतदाताओं को निर्वाचन की प्रक्रिया में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करेगा और वे भारत के जिम्मेदार नागरिक बन सकेंगे।

फेसबुक द्वारा मतदाता पंजीकरण स्मरण की भारत में पहली बार निर्धारित शुरूआत के बारे में फेसबुक की भारत, दक्षिण और मध्य एशिया की पब्लिक पॉलिसी डायरेक्टर सुश्री अंखी दास ने कहा कि लोग फेसबुक का इस्तेमाल सीखने, बातचीत करने और अनेक अन्य मुद्दों से जुड़ने के लिए करते हैं। हमारा विश्वास है कि जब कुछ और लोग जुडेंगे तो लोकतंत्र मजबूत होगा।

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वीके/केपी/एमएम-1871

Wednesday, 14 June 2017

गोवा में आयोजित ‘अखिल भारतीय हिन्दू अधिवेशन’ में भारत के 17 राज्यों सहित नेपाल,बांग्लादेश और श्रीलंका के 150 से अधिक हिन्दू संगठनों के 400 से अधिक प्रतिनिधि हो रहे हैं उपस्थित !

गोवा के षष्ठ ‘अखिल भारतीय हिन्दू अधिवेशन’में राजस्थान के संत, संघटन आैर अधिवक्ताआें का सहभाग !


      ‘हिन्दू राष्ट्र’ की स्थापना हेतु हिन्दुत्वनिष्ठ संगठनों का राष्ट्रव्यापी संगठन निर्माण करने के उद्देश्य से षष्ठ ‘अखिल भारतीय हिन्दू अधिवेशन’ 14 जून से गोवा में प्रारम्भ हो रहा है । हिन्दू जनजागृति समितिमध्यप्रदेश के समन्वयक  श्रीयोगेश व्हनमारे ने बताया कि 17 जून तक चलनेवाले इस अधिवेशन में भारत के 17 राज्यों सहित नेपाल,बांग्लादेश और श्रीलंका के 150 से अधिक हिन्दू संगठनों के 400 से अधिक प्रतिनिधि उपस्थित रहेंगे । इसके लिए जोधपूर और अलवर से संघटनाआें के प्रतिनिधी एवं अधिवक्ता सम्मिलित होनेवाले हैं । हिन्दुत्वनिष्ठ दल सत्ता में होने पर भी हिन्दुआें की पिछले अनेक वर्षों से लंबित मांगें अभी तक पूर्ण नहीं हुई हैं । कश्मीरी हिन्दुआें का पुनर्वासधारा 370 निरस्त करना,गोवंश हत्या प्रतिबंधराममंदिर का पुनर्निर्माण आदि विषयों पर सरकार ने कोई भी ठोस भूमिका नहीं ली है । इसलिए हिन्दुत्वनिष्ठ संगठनों ने अब आगे बढकर हिन्दू राष्ट्र का उद्घोष जनता तक पहुंचाने के लिए इस अधिवेशन के माध्यम से निश्‍चय किया है । इस अधिवेशन में जोधपूर से रामस्नेही संप्रदाय (बडा रामद्वाराके पूज्य हरिराम शास्त्री महाराजअधिवक्ता मोतिसिंह राजपुरोहितजीअलवर से हिंदु युवा वाहिनी के अध्यक्ष श्रीप्रेम गुप्ता और सचिव श्रीराजन गुप्ता भी सम्मिलित हो रहे है ।

Wednesday, 26 April 2017

राजस्थान विधान सभा के सदस्यों एवं पूर्व सदस्यों के वेतन भत्तों में बढ़ी बढ़ोतरी, किसी भी वर्ग या समाज के लिए ऐसे निर्णयों का ओचित्य सामने आना चाहिए

राजस्थान विधानसभा में दिनांक 26 अप्रेल 2017 को विधानसभा के सदस्यों, पूर्व सदस्यों एवं मंत्रियों के वेतन - भत्ते बढाने सम्बन्धी विधेयक पारित किया गया| राजस्थान सरकार के इस निर्णय से इन सदस्यों एवं मंत्रियों के  10 से 20 हजार तक वेतन बढ़ गए हैं, वहीं भत्ते एवं सुविधाओं पर भी व्यय बढ़कर सरकार या जनता पर बड़ा वित्तीय भार बढ़ गया है|
इस प्रकार के निर्णयों में कोई भी पार्टी की सरकार हो, चाहे वह केंद्र में हो या प्रदेश में, किसी वर्ग या समाज के लिए लोक लुभावनी घोषणाएं करती रहती है|  ऐसा कब तक चलेगा ?  किसी भी वर्ग के लिए सरकार पर बड़ा  वित्तीय भार डालकर ऐसे निर्णयों के पीछे कोई बहुत बड़ा औचित्य पूर्ण दृष्टिकोण सबके सामने स्पष्ट होना चाहिए, जनता के सामने यह कारण आना चाहिए कि इसके पीछे क्या कारण है, इसकी ठोस वजह क्या है| मात्र सदन में बहुमत होने से कोई भी पार्टी जब चाहे इस प्रकार का बड़ा निर्णय ले ले, यह अत्यंत अनुचित है|
मजेदार बात ये है कि वोट बैंक की राजनीति के चलते कोई भी पार्टी की सरकार अपने समय में किसी वर्ग या समाज के हित में इस प्रकार के निर्णय ले लेती है, किन्तु दूसरी ओर विपक्षी पार्टी उस सम्बंधित वर्ग या समाज के लिए, लिए गए ऐसे निर्णय का विरोध भी नहीं कर पाती है, क्योंकि इससे उसके वोट बैंक का नुकसान होगा| इस प्रकार बहुत बार अनावश्यक सुविधाएं या अत्यंत लाभ देने वाले निर्णय बिना किसी बहस या विरोध के आसानी से पारित हो जाते हैं| अभी तक तो बहुत  मामलों में ऐसा ही हो रहा है| ऐसी स्थिति में प्रश्न उठता है कि ये सब रुकेगा कैसे ?  मेरा आशय सभी लोक लुभावने निर्णयों से न लिया जावे, कई बार जिन्हें हम लोक लुभावना निर्णय या घोषणा समझें, हो सकता है वह सही ही हो और वास्तव में उसकी जरूरत भी हो| अपना दृष्टिकोण उसे न देख पा रहा हो, यह भी संभव है|
सत्तासीन पार्टी का मुखिया सत्ता संभालते समय शपथ लेता है कि वह बिना किसी जाति एवं भेदभाव के न्याय पूर्ण ढंग से हर व्यक्ति, वर्ग या समाज के हित में निर्णय लेगा, राष्ट्र एवं प्रदेश हित में पूरी निष्पक्षता से शासन चलाएगा, किन्तु दु:खद तथ्य है कि कोई भी इसमें खरा नहीं उतर रहा है| आमजन को कोई भी पार्टी लम्बे समय तक संतुष्ट नहीं रख पा रही है और प्राय: कर अभी तक एक पार्टी के शासन के बाद दूसरी विपक्षी पार्टी को वोट देकर एक बार फिर आश लगा बैठती है या ज्यादा असंतुष्ट होने पर दूसरी विपक्षी पार्टी के हित वोट देकर सत्तासीन पार्टी के खिलाफ रोष  निकाल देती है|
वोट बैंक बनाने की होड़ में सत्तासीन पार्टी ये बड़ी भूल कर रही है कि वे जिस लोक लुभावने निर्णय से किसी वर्ग, समाज या धर्म के लोगों में अपनी पकड़ करना चाहती है तो ऐसा करके वो उससे दूसरे किसी विपरीत वर्ग  के वोटों से हाथ भी धो बैठती है|  मेरे विचार से वह समाज या वर्ग भी यह जानता है कि उसके हित में यह बिना ओचित्य के बड़ी भारी सुविधा देने वाला निर्णय वोटों की राजनीति के तहत  लिया  जा रहा  है, अत: जरुरी नहीं कि वह वर्ग या समाज भी उसको पूर्ण रूपेण संख्या में वोट दे ही दे और उस पार्टी का वोट बैंक मजबूत हो जावे| आमजन सब कुछ देखते रहते हैं और वे हर घटना या घोषणा को याद रखते हैं और चुनाव आने पर उस परिपेक्ष्य को ध्यान में रखते हुए वोट देकर सत्ता बदल देते हैं| अत: आवश्यकता इस बात कि है कि कोई भी पार्टी की सरकार हो, चाहे वह केंद्र में हो या प्रदेश में, जब भी किसी वर्ग, समाज या धर्म के लिए लुभाने जैसी घोषणा करे तो वो ही निर्णय ले, जिसमें पूरी निष्पक्षता झलके, ईमानदारी दिखे, अर्थात निर्णय की ठोस वजह जनता को बतलाई जा सकनी संभव हो या  जिसका औचित्य सिद्ध किया जा सके, केवल ऐसी ही घोषणाएं करे|
ताजा उदाहरण हमारे सामने है, दिल्ली  नगर निगम के चुनाव, वहां के  मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने चुनाव से पूर्व कितनी लोक लुभावनी (सरकार पर वित्तीय भार बढाने वाली) घोषणाएं की थी, और निर्णय क्या हुआ, सबके सामने है|

Monday, 9 January 2017

नोटबंदी पर नवीनतम लेख

कड़े निर्णयों से ही देश बन सकेगा समृद्धिशाली विकसित राष्ट्र
                                                               (लेख  - ज्योतिर्विद महावीर कुमार सोनी)

मोदी सरकार के नोटबंदी के निर्णय पर तरह तरह से सवाल उठा रहे लोगों के पास अब इसको लेकर आलोचना का एक मुख्य मुद्दा भी अब समाप्त हो गया, जब आई. टी. विभाग ने निर्देश जारी कर 8 नवम्बर से पहले बैंक बचत खातों में हुए लेन देन की जानकारी हेतु बैंकों के लिए आदेश जारी कर दिए। सैन्ट्रल बोर्ड ऑफ़ डायरेक्ट टैक्सेज (सी.बी.डी.टी) द्वारा 6 जनवरी को जारी राजपत्रित अधिसूचना में कहा गया है कि सभी बैंक मूल भूत बचतों तथा समय आधारित जमाओं को छोड़कर सभी नकद जमाओं की पूरी जानकारी आयकर विभाग को उपलब्ध कराएं।
ज्ञातव्य है की भाजपा सरकार पर यह आरोप विगत कई दिनों से लग रहा था कि नोटबंदी की जानकारी भाजपा के कई नेताओ को पूर्व से ही थी, अत: नोटबंदी के निर्णय से पूर्व ही इनके द्वारा 500 एवं 1000 के नोट बदलने का कार्य बड़े स्तर पर हो गया।  इसके मद्देनजर कई राजनैतिक पार्टियों के नेता यह मांग कर रहे थे कि सरकार 8 नवम्बर 2016 के पहले बैंकों में हुए लेन देन को सामने लाने के निर्देश जारी करे, क्योंकि नोटों को बदलने का कार्य तो 8 नवम्बर से पूर्व ही हो गया था। 
आयकर विभाग द्वारा अब सभी बैंकों और डाकघरों से 1 अप्रेल 2016 से 9 नवम्बर के बीच सेविंग अकाउंट में जमा होने वाले कैश डिपॉजिट की रिपोर्ट मांगी है। आयकर विभाग ने नोट बंदी से पहले हुए लेनदेन के बारे में जानकारी हासिल करने के उद्देश्य से यह रिपोर्ट मांगी है। इस निर्णय से मोदी सरकार की एक और निष्पक्षता सामने आ गई है, वहीं इस तरह की मांग के साथ नोट बंदी के प्रति आलोचना कर रहे आलोचकों के पास अब इस मुद्दे पर कहने के लिए कुछ ख़ास नहीं रहा है। यदि सरकार 9 नवंबर से पूर्व बैंक डिपाजिट संबंधी लेनदेन को सख्ती के साथ निर्धारित समय सीमा में प्राप्त कर इसकी सूचना सार्वजनिक कर देती है तो यह देश के इतिहास में ऐसा कदम कहलाएगा जिसकी तुलना किसी अन्य साहसिक निर्णय से करना कठिन हो जावेगा, वहीँ यह कदम सदभावना पूर्वक आलोचना करने वालों को भी यह कहने को मजबूर कर देगा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार की कथनी और करनी एक है, उनकी नजर में सब बराबर है, यदि कोई गलत कर रहा है चाहे भाजपा का नेता हो, या दूसरी पार्टी का, इससे उन्हें कोई सरोकार नहीं है। कानून की नज़र में सब बराबर है, जिसने जो किया है उसकी उसे सजा भुगतनी ही होगी।  
उल्लेखनीय है कि सम्पति शोध कंपनी न्यू वर्ल्ड के अनुसार रूस के बाद भारत दुनिया का सबसे ज्यादा असमानता वाला देश है, जहाँ पर 54 प्रतिशत सम्पति मात्र कुछ करोड़पतियों के हाथ में है। भारत दुनिया के 10 सबसे अमीर देशों में है, जहाँ कुल संपत्ति 5600 अरब डॉलर है, लेकिन औसतन भारतीय गरीब है। वैश्विक तौर पर रूस दुनिया का सबसे ज्यादा असमानता वाला देश है,जहाँ कुल सम्पति के 62 प्रतिशत पर मात्र कुछ धन कुबेरों का नियंत्रण है। वहीँ दूसरी तरफ जापान दुनिया में सबसे ज्यादा समानता वाला देश है, जहाँ धनवान लोगों के हाथ में कुल सम्पति का 22 प्रतिशत हिस्सा है। आस्ट्रेलिया में कुल सम्पति के 28 प्रतिशत पर धन कुबेरों का आधिपत्य है, इसके बाद अमेरिका एवं ब्रिटेन भी समानता वाले देशों में है, इनमें कुल सम्पति के क्रमशः 32 प्रतिशत एवं 35 प्रतिशत पर धनाढ्य लोगों का कब्ज़ा है। संपत्ति के आधार पर देशों में असमानता वाली यह जानकारी hindi.cobrapost.com में दर्शाई गई है। 
संपत्ति में असमानता की दृष्टि से भारत दूसरा बड़ा राष्ट्र है जहाँ सम्पति की दृष्टि वाली इस असमानता को एक दिन में नहीं सुधारा जा सकता। जापान एवं आस्ट्रेलिया जैसी धन की समानता वाली स्थिति में लाने के लिए भी सरकार को बिना भेद भाव के ऐसे कई कड़े निर्णय लागू करने पड़ेंगे। कड़े निर्णय लेना और उनको दृढता से लागू करना, दो अलग अलग पहलू हैं। पहले यह सोचना कि निर्णय कैसा है, इसके दूरगामी परिणाम क्या क्या हो सकते हैं, दूसरा इसको कैसे लागू किया गया है, इसमें क्या चूक थी जिसकी वजह से जो संभावित लाभ थे वे एकदम से नहीं मिल पाए हैं या भविष्य में संभावित तिथि से कितने दिन बाद तक प्राप्त हो पाएंगे। ये दोनों बातें अलग अलग है।
नोटबंदी का यह निर्णय नि:संदेह ऐसा निर्णय है जो अत्यंत कड़ा अवश्य है किंतु इसका फल ठीक वैसे ही है, जैसे कोई खाने की कड़वी ऐसी चीज जो खाने में बेहद कड़वी अवश्य होती है किन्तु पेट एवं स्वास्थ्य की दृष्टि से अत्यंत गुणकारी एवं स्वस्थकारक सिद्ध होती है। इस साहसिक निर्णय की जितनी सराहना की जावे, वह कम ही कहलाएगी, क्योंकि इसके दूरगामी परिणाम इतने सुंदर होंगे, जिसकी हम अंशतः ही कल्पना कर पा रहे हैं।
नोटबंदी के पक्ष में मेरे ही ऐसे विचार हों, ऐसा मैं नहीं सोचता हूँ, यदि इस सम्बन्ध में अब तक हुए सबसे बड़े सर्वे के आंकड़ों को भी देखा जावे तो उससे भी प्रतीत होता है कि लाख तकलीफों के बावजूद भी ज्यादातर लोग मोदी जी के साथ खड़े है। यह सर्वे भी उस दौरान का है जब नोटबंदी लागू हुए कुछ ही दिन बीते थे और लोगों की परेशानियां बढ़ रही थी। इनसॉर्ट द्वारा ग्लोबल मार्केट रिसर्च कंपनी IPSOS की मदद से किए गए इस सर्वें में 82 फीसदी लोगों ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नोट बंदी के फैसले को सही ठहराया था। यानी 2014 के लोकसभा चुनाव से भी बड़ा जनसमर्थन उन्हें इस मसले पर  मिलता हुआ नजर आ रहा था। सर्वे में जबकि 84 फीसदी जनता का मानना है कि काले धन को लेकर केंद्र सरकार वाकई गंभीर है। ग्लोबल मार्केट रिसर्च कंपनी IPSOS के सर्वे से पता चला है कि युवा भारत मोदी के समर्थन में खड़ा है। सिर्फ यंग इंडिया ही नहीं बल्कि अर्बन इंडिया ने भी ब्लैक मनी को लेकर सरकार की स्ट्रैटजी की सराहना की है। ये सर्वे करीब पांच लाख लोगों की राय पर आधारित था और उसमें भी करीब 80 फीसदी लोगो की उम्र 35 साल से कम थी। ऐसे में सर्वे के निष्कर्ष बतातें है कि देश का युवा और मेट्रो सिटी में रहने वाले लोग इस बात को मानते है कि काले धन और भ्रष्टाचार को लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी की जो रणनीति है वो काफी बेहतर हैं। उसकी सराहना की जा रही हैं। देश की जनता इस बात को भी मान रही है कि उन्हें तकलीफ हो रही है, लेकिन ब्लैक मनी और भ्रष्टाचार के खात्मे के लिए वो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ खडी नजर आ रही है। यद्यपि यहाँ यह कहना उचित होगा कि किसी भी सर्वें को समस्त जनता की राय नहीं माना जा सकता है, यह एक संकेत भर होता है, एक अनुमान होता है, यह पूर्ण सत्य को भी दृष्टिगोचर कर सकता है और नहीं भी, क्योंकि  इसमें कुछ लोगों से ही रायशुमारी की जाती है। सर्वे की यह रिपोर्ट indiatrendingnow.com से ली गई है, सर्वे के सम्बन्ध में विस्तृत जानकारी इस साईट पर विजिट करके भी देखी जा सकती है। कुछ लोगों पर किए गए इस सर्वे के आंकड़ों से या मीडिया में दिखाई दे रहे लेखों से या विभिन्न इंटरव्यूज में, मोदी जी के इस निर्णय की सराहना ज्यादा आलोचना कम दिखाई दे रही है और अब जब 9 नवम्बर से पहले के लेनदेन को भी सामने लाने की पहल सम्बंधित विभाग द्वारा कर दी गई है, तो इस विषय पर आलोचना के लिए आलोचकों के पास कुछ विशेष नहीं रहा है।

Friday, 18 November 2016

"ऑल इंडिया सोशल मीडिया फोरम" का गठन

समाज कल्याण को तीव्र गति देने की दिशा में सोशल मीडिया एडमिन्स एवं यूर्जस के कल्याणार्थ सोशल मीडिया शक्तिकरण के उद्देश्य से लेखकों, पत्रकारों, समाज सेवकों, फिल्म निर्माता - निर्देशकों एवं एडवोकेट्स ने मिलकर किया "सोशल मीडिया फोरम" का गठन

जयपुर। सोशल मीडिया के असंख्य लाभ हैं किंतु इससे कुछ हानियां भी सामने आई है, बड़ी संख्या में लोग इससे लाभ प्राप्त कर रहे है, किन्तु कुछ लोग इसका दुरुपयोग भी कर रहे है, जो अत्यंत अनुचित है। ऐसे कुछ लोगों की वजह से आपस में एक दूसरे तक अत्यंत सरलता, सहजता एवं मितव्ययता से उपयोगी जानकारियों एवं सूचनाओं को एक दूसरे तक पहुँचाने वाले, विभिन्न जाति, वर्ग के लोगों को आपस में जोड़ने वाले इस महत्वपूर्ण साधन पर रोक, आंशिक रोक, अंकुश तक की बात कई बार सुनने में आती रही है। जबकि इस पर किसी भी प्रकार की रोक के स्थान पर इसके उपयोगकर्ताओं के लिए इसे सही ढंग से जानने या उनके लिए प्रशिक्षण, वर्कशॉप, जागरूकता कार्यक्रमों की आवश्यकता है, जिससे इस साधन का दुरूपयोग करने वालों से स्वयं भी बचा जा सके और दूसरों को भी बचाया जा सके एवं इस सुलभ साधन द्वारा लाभ ही लाभ हों, हानियां न हो।
विचार अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का दायरा बढ़ाने में अग्रसर इस साधन से विभिन्न रचनात्मक एवं सामाजिक कार्यक्रमों को मितव्ययी एवं सहजता से अधिकाधिक गति मिले, इसके लिए सोशल मीडिया वेलफेयर की आवश्यकता को महसूस करते हुए उक्त विचारो के साथ इस दिशा में विगत काफी समय से सकारात्मक एवं रचनात्मक प्रयास करते हुए सोशल लीडर एवं सीनियर जर्नलिस्ट महावीर कुमार सोनी द्वारा एक और बड़े प्रयास के रूप में बुलाई गई बैठक में फेसबुक एडमिन्स, व्हाट्स एप्प ग्रुप्स एडमिन्स, पत्रकार, लेखक, एडवोकेट्स आदि ने उपस्थित होकर सोशल मीडिया सशक्तिकरण के प्रयास में कंधे से कंधे मिलाकर साथ देने का वायदा किया। वक्ताओं ने अपने अपने विचारों में सोनी के उक्त उदगारों का समर्थन किया। वक्ताओं ने अपने अपने अनुभव शेयर करते हुए बताया कि आम लोगों के विभिन्न बड़े संकटों एवं समस्याओं का इससे त्वरित समाधान हुआ है, भविष्य में राज्य एवं जनहितकारी कार्यक्रमों को इससे त्वरित गति देने के लिए सोशल मीडिया के शक्तिकरण एवं कल्याण की आवश्यकता है। जिसके मद्देनजर सबने समर्थन करते हुए सर्वसम्मति से एक मंच गठित करने की आवश्यकता बतलाई, उपस्थित लोगों ने आपस में चर्चा कर सर्व सम्मति से इसके लिए "ऑल इंडिया सोशल मीडिया फोरम" के नाम से मंच गठन करने पर मोहर लगाई। इसके बाद प्रस्ताव पारित कर इस मंच के लिए सर्वसम्मति से अध्यक्ष के रूप में श्री महावीर कुमार सोनी को चुना गया। उपस्थित सभी लोगों ने इसकी कार्यकारिणी में शामिल होकर जो जिम्मेदारी संघ अध्यक्ष देंगे, उसको निभाने का वायदा किया, शपथ ली। इसके बाद अध्यक्ष महोदय द्वारा निम्नानुसार लेखक गण, पत्रकार, फिल्म निर्माता, फिल्म निर्देशक, समाजसेवी, रंगमंच कर्मी, एडवोकेट्स आदि में से संस्थापक सदस्यों की प्रथम कार्यकारिणी निम्नानुसार घोषित की गई :-
1. श्री महावीर कुमार सोनी
2. श्री इंदरजीत शर्मा
3. श्री तपन भट्ट
4. श्री अबरार अहमद
5. श्री अविनाश त्रिपाठी
6. श्री वीरेंद्र गोदीका, एडवोकेट
7. श्रीमती ललिता महरवाल, एडवोकेट
8. श्री अकबर खान
9. श्रीमती पूजा पवन कुमार
10. श्री अक्षय जैन, मोदी
11. श्रीमती मीनाक्षी माथुर
12. श्री महेंद्र सोनी
13., श्री दीपक दाधीच
14. श्री प्रवीण जाखड़
15. श्रीमती रेनू शर्मा
16. श्री श्रवण मेहरड़ा
16. श्री चोथमल बघेरिया
17. शुभम शर्मा
18. हरि प्रसाद शर्मा
19. डॉ. टीना जैन
20. वी पी हलचल
21. डॉ. सुभाष यादव
22. बनवारी यादव
23. मनीष जैसलमेरिया
24. मनोज भारद्वाज